कोरबा : AC में सो रहे अधिकारी-नेता, अंधेरे में रात काट रहे ग्रामीण… बरपाली सब स्टेशन का घेराव, चक्का जाम की चेतावनी

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कोरबा/बरपाली। ऊर्जाधानी कोरबा में बिजली उत्पादन के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि जहां से प्रदेश को रोशन करने वाली बिजली निकलती है, वहीं बरपाली सब स्टेशन से जुड़े दर्जनों गांव कई दिनों से अंधेरे में डूबे हुए हैं। बरसात के मौसम में उमस भरी गर्मी, सांप-बिच्छू का डर और लगातार बिजली संकट ने ग्रामीणों का सब्र तोड़ दिया। सोमवार शाम सैकड़ों महिला-पुरुष बरपाली विद्युत सब स्टेशन पहुंच गए और शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक धरने पर डटे रहे।

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धरने पर बैठे ग्रामीणों ने साफ कहा कि “जब तक हमारे क्षेत्र की बिजली बहाल नहीं होगी, तब तक दूसरे फीडरों में भी बिजली नहीं चलने देंगे।” ग्रामीणों के विरोध के दौरान अन्य फीडरों की बिजली भी बंद कराई गई और पूरे क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा हुआ।

एक सप्ताह से अंधेरे में गांव, ट्रांसफार्मर बदलने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि बरपाली, सलिहाभांठा, बंधवाभांठा, डोंगरीभांठा, पकरिया, सराईडीह, सरगबुंदिया, पहंदा, नवापारा सहित दर्जनों गांव पिछले एक सप्ताह से बिजली संकट झेल रहे हैं। कई क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं, जबकि जगह-जगह फॉल्ट होने के बावजूद विभाग गंभीर नहीं है। ग्रामीणों ने खराब ट्रांसफार्मर तत्काल बदलने और पूरे क्षेत्र की बिजली बहाल करने की मांग की।

शराब के नशे में ड्यूटी करने का आरोप

धरने के दौरान ग्रामीणों ने बिजली विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बरपाली सब स्टेशन के कुछ कर्मचारी शराब के नशे में ड्यूटी करते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मौके पर मौजूद एक ऑपरेटर पर भी नशे में होने का आरोप लगाया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि सब स्टेशन में पदस्थ जेई अक्सर ड्यूटी पर नहीं आते, जिससे छोटी-छोटी समस्याएं भी दिनों तक बनी रहती हैं।

नेताओं पर भी फूटा गुस्सा

ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी जमकर निशाना साधा। उनका कहना था कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब जनता की सुध लेने तक नहीं आते। हैरानी की बात यह है कि यह वही इलाका है जहां पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर और पूर्व सांसद स्वर्गीय डॉ. बंशीलाल महतो का गृहग्राम स्थित है। इसके बावजूद क्षेत्र के लोग बुनियादी सुविधा बिजली के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि मंत्री, विधायक, सांसद और बड़े नेता एसी-कूलर में आराम से सो रहे हैं, जबकि गांव की जनता अंधेरे में रात गुजार रही है।

मंगलवार तक बिजली नहीं आई तो होगा चक्का जाम

करीब तीन घंटे तक चले धरने के बाद विभाग के डीई ने आश्वासन दिया कि मंगलवार तक सभी फॉल्ट दूर कर बिजली बहाल कर दी जाएगी और खराब ट्रांसफार्मर भी बदल दिए जाएंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया।

हालांकि ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक बिजली व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं हुई, तो सड़क पर उतरकर चक्का जाम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि बिजली नहीं होने के कारण यदि अंधेरे में किसी ग्रामीण की सांप, बिच्छू या अन्य जहरीले जीव के काटने से मौत या कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और प्रशासन की होगी।

सबसे बड़ा सवाल यही है— आखिर ऊर्जाधानी कोरबा के गांव ही कब तक अंधेरे में रहेंगे? और कब तक जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ते रहेंगे?

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