शासकीय जमीन पर खड़ा मोबाइल टावर! फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की कमाई का आरोप, कलेक्टर से एफआईआर और टावर हटाने की मांग

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कोरबा। जिले में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध तरीके से स्थापित मोबाइल टावर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अरशद लारी ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि अधिग्रहित शासकीय भूमि को निजी भूमि बताकर मोबाइल टावर स्थापित किया गया और वर्ष 2005 से अब तक लाखों रुपये का किराया अवैध रूप से वसूला गया। शिकायत में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, टावर हटाने और अब तक प्राप्त किराए की राशि शासन के पक्ष में राजसात करने की मांग की गई है।

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शिकायत के अनुसार, खसरा नंबर 139 की भूमि वर्ष 1978 में एनटीपीसी तथा हसदेव परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। वर्तमान राजस्व अभिलेखों में भी संबंधित भूमि का एक हिस्सा एनटीपीसी तथा दूसरा हिस्सा हसदेव परियोजना के नाम दर्ज है। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि निजी स्वामित्व दर्शाकर मोबाइल टावर स्थापित किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि नगर निगम से वर्ष 2005 में मिली अनापत्ति (NOC) के आधार पर टावर लगाया गया था, जबकि बाद में हुए सीमांकन पंचनामा और तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में टावर शासकीय खसरा नंबर 139/2 पर स्थित होना बताया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि तहसीलदार न्यायालय के आदेश के बावजूद कथित रूप से शासकीय भूमि से आर्थिक लाभ लिया जाता रहा।

कलेक्टर को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि यह मामला फर्जी दस्तावेजों के उपयोग, धोखाधड़ी और शासकीय भूमि से अवैध आर्थिक लाभ अर्जित करने से जुड़ा है। शिकायत में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, शासकीय भूमि से मोबाइल टावर हटाने तथा वर्ष 2005 से अब तक प्राप्त किराए की राशि की जांच कर शासन के पक्ष में वसूली करने की मांग की गई है।


फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है। जिला प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। इस मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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