एक ही काम के नाम पर कई बार भुगतान, बिना बैठक और बिना प्रस्ताव निकले लाखों रुपये! कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत लेकर पहुंचेंगे स्थानीय पत्रकार सरोज कुमार रातरे, उच्च स्तरीय जांच की मांग।
कोरबा। ग्राम पंचायत सलिहाभांठा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचायत के बैंक खातों से लाखों रुपये निकाले जाने, बिना कार्य भुगतान करने, एक ही काम के लिए बार-बार राशि जारी करने और कथित फर्जी वेंडरों के खातों में सरकारी पैसा ट्रांसफर किए जाने के आरोपों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में न तो नियमित बैठकें होती हैं और न ही पंचों को वित्तीय निर्णयों की जानकारी दी जाती है। अधिकांश भुगतान सरपंच और सचिव की सहमति से किए गए, जबकि कई कार्य धरातल पर दिखाई ही नहीं देते।

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कई ऐसे वेंडरों के खातों में भी लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए जिनके नाम से स्थानीय स्तर पर कोई दुकान तक मौजूद नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि दुकान ही नहीं है तो सामान कहां से खरीदा गया और सरकारी पैसा आखिर किसके खाते में पहुंचा?

दस्तावेजों के अनुसार सितंबर माह में अलग-अलग मदों में लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि कई कार्य कागजों में पूरे कर दिए गए, जबकि मौके पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है। इतना ही नहीं, एक ही कार्य के नाम पर अलग-अलग तारीखों में कई बार भुगतान किए जाने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।

25 अलग-अलग खातों में ₹1566-₹1566 की राशि ट्रांसफर किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित लोगों ने कोई कार्य नहीं किया, न मस्टर रोल है और न ही भुगतान का स्पष्ट आधार। ऐसे में यह राशि किस नियम के तहत जारी की गई, इसकी जांच आवश्यक है।

ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत के बैंक स्टेटमेंट, बिल, वाउचर, मस्टर रोल, स्टॉक रजिस्टर, प्रस्ताव रजिस्टर और सभी भुगतान रिकॉर्ड जब्त कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आ सके।

स्थानीय पत्रकार सरोज कुमार रात्रे ने बताया कि वे इस पूरे मामले की विस्तृत शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत करेंगे और उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। उनका कहना है कि यदि सभी दस्तावेजों की गहन जांच कराई गई तो पंचायत में हुए कथित वित्तीय खेल की परतें खुल सकती हैं।
गौरतलब है कि सलिहाभांठा पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर एवं पूर्व सांसद बंसीलाल महतो का गृह ग्राम है। ऐसे गांव में पंचायत निधि को लेकर उठे सवाल अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या शिकायत के बाद निष्पक्ष जांच होगी और यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
