प्रति बोरा 800 ग्राम अधिक तौल, निरीक्षण के बाद भी नहीं मिली खामी—प्रशासन की भूमिका पर सवाल*

जांजगीर–चांपा जिले के करन्नौद धान खरीदी केंद्र में किसानों से निर्धारित मानक से अधिक धान लेने का मामला सामने आया है। शासन के निर्देशानुसार प्रति बोरा 40 किलोग्राम धान के साथ मात्र बोरा का वजन जोड़ा जाना अनिवार्य है, लेकिन केंद्र में किसानों से 41 किलो 300 ग्राम तक तौलकर धान खरीदा जा रहा है। इस प्रकार प्रत्येक बोरे में लगभग 800 ग्राम अतिरिक्त धान लिया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधे-सीधे नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, और इसकी जानकारी कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को दिए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। किसानों का कहना है कि अतिरिक्त तौल को किसी भी नियम में अनुमति नहीं है, ऐसे में यह सीधे तौर पर अवैध वसूली की श्रेणी में आता है।
मामले पर खरीदी प्रभारी रथलाल डड़सेना का कहना है कि “धान में सूखती की वजह से तौल में अंतर आता है।” हालांकि किसानों का स्पष्ट आरोप है कि सूखती का हवाला देकर अधिक तौल को उचित ठहराया जा रहा है, जो सरासर गलत है।
प्रभारी ने यह भी जानकारी दी कि कुछ समय पूर्व फूड इंस्पेक्टर सुशील विश्वकर्मा केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें किसी प्रकार की खामी नजर नहीं आई। वहीं, जब अधिक तौल के संबंध में स्पष्टीकरण लेने के लिए फूड इंस्पेक्टर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव तक नहीं किया, जिससे किसानों की शंकाएँ और गहरी हो गई हैं।
किसानों का कहना है कि प्रशासन यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं करता तो उनकी मेहनत का सही मूल्य देने का दावा केवल कागजों में सीमित रह जाएगा। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि करन्नौद धान खरीदी केंद्र की तत्काल जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि किसानों का भरोसा शासन-प्रशासन पर कायम रहे।
अब देखना यह होगा कि जिल प्रशासन इस गंभीर शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या किसानों को न्याय मिल पाता है।
