चिकनीपाली धान खरीदी केंद्र में अवैध धान का खेल बेनकाब, शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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चिकनीपाली धान खरीदी केंद्र में संदिग्ध तरीके से पहुंचे दो ट्रैक्टर धान ने एक बार फिर धान खरीदी व्यवस्था की पोल खोल दी है। मामले की सूचना एसडीएम और तहसीलदार को दे दी गई है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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जानकारी के अनुसार किसान ईश्वरी प्रसाद पटेल, निवासी गनियारी के नाम पर 98.80 क्विंटल धान की टोकन जारी की गई है, जबकि गांव के ही लोगों का साफ कहना है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा खेती-किसानी नहीं की जाती। यदि खेती ही नहीं की गई, तो धान आया कहां से और टोकन किस आधार पर काट दी गई?
सूत्रों से यह भी खुलासा हुआ है कि धान से भरी ट्रैक्टर शक्ति जिले के जगदल्ली गांव से लाई गई है, जो सुबह-सुबह काशी पानी मार्ग से होते हुए चिकनिपाली धान खरीदी केंद्र पहुंची। यह सीधा संकेत है कि बाहरी और अवैध धान को खपाने की कोशिश की जा रही है।


सबसे गंभीर सवाल भौतिक सत्यापन को लेकर खड़ा हो रहा है। शासन-प्रशासन भले ही घर-घर जाकर सत्यापन करने का दावा कर रहा हो, लेकिन जब ग्राम सेवक ने खुद भौतिक सत्यापन नहीं करने की बात कही, तो फिर यह सत्यापन आखिर किसने किया? किस अधिकारी की मेहरबानी से बिना खेती वाले व्यक्ति के नाम पर धान का टोकन जारी हो गया?
जैसे-जैसे धान खरीदी का अंतिम समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे अवैध धान के मामले सामने आ रहे हैं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि या तो निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल है, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
अब निगाहें एसडीएम और तहसीलदार की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे, या फिर शासन-प्रशासन की चुप्पी अवैध धान माफियाओं का हौसला और बढ़ाएगी? यह मामला केवल एक किसान का नहीं, बल्कि पूरी धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

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