सरोज रात्रे/-कोरबा में अवैध धान कारोबार करने वालों पर आखिरकार गाज गिर ही गई। कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर बनी संयुक्त टीम ने तिलकेजा में छापा मारकर व्यापारी संतोष अग्रवाल के गोदाम से 37 बोरी / 14.60 क्विंटल अवैध धान बरामद किया। मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए धान जब्त कर लिया गया। कार्रवाई इतनी अचानक थी कि आसपास के धान व्यापारियों में भूचाल जैसा माहौल है।

लेकिन यहाँ बड़ा सवाल ये है कि
क्या सिर्फ एक व्यापारी पर कार्रवाई कर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ले?
क्योंकि हकीकत ये है कि—
✔ हर साल जिले में धड़ल्ले से अवैध धान व्यापार होता है।
✔ कई बड़े व्यापारी खुलेआम धान का काला कारोबार करते हैं।
✔ सीमावर्ती क्षेत्रों में धान का खेल किसी से छुपा नहीं है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस साल प्रशासन की ओर से बॉर्डर पर कोई भी कड़ी निगरानी नहीं लगाई गई।
जहां हर साल कोरबा–शक्ति–जांजगीर चांपा बॉर्डर और लबेद क्षेत्र में बैरिकेडिंग, पुलिस बल, पंचायत सचिव और कोटवारों को तैनात किया जाता था, इस बार प्रशासन खामोश बैठा है।

इस लापरवाही का सीधा फायदा कौन उठा रहा है?
अवैध धान तस्कर!
किसानों का साफ कहना है कि अगर विभाग ईमानदारी से कार्रवाई करे तो एक नहीं, दर्जनों व्यापारी पकड़े जाएंगे, जो हर सीज़न में अवैध धान का धंधा कर करोड़ों कमाते हैं।
- क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से की मांग—
➡️ सिर्फ दिखावटी कार्रवाई नहीं, बड़े व्यापारियों पर भी शिकंजा कसा जाए
➡️ सीमावर्ती क्षेत्रों में तत्काल निगरानी चौकियां बहाल की जाएं
➡️ धान परिवहन पर सख़्त नज़र रखी जाए
क्योंकि सच यही है—
अगर प्रशासन की निगरानी ढीली रही, तो अवैध धान कारोबारियों का सीज़न फिर से शुरू हो जाएगा।
