नवा रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ की रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना, जो बेटियों को सुरक्षित और सक्षम बनाने के लिए चलाई जाती है, उसी योजना में हाथ मारने वाले प्राचार्य कमल नारायण भारद्वाज पर आखिरकार बड़ा शिकंजा कस गया है।
शासन की जांच में यह साफ हो गया कि उन्होंने कराटे प्रशिक्षक से कमिशन की खुली मांग की थी—यानी बेटियों की सुरक्षा के नाम पर आने वाली राशि में भी “कट” लेने से नहीं चूके।
ऑडियो–वीडियो सबूतों में पकड़ा गया भ्रष्टाचार
प्रशिक्षक करण कुमार बरेठ ने शिकायत में ऑडियो, वीडियो और फोटोग्राफ जमा किए थे, जिनमें प्राचार्य द्वारा ₹15,000 के मानदेय में से ₹5,000 की मांग साफ नजर आई।
यही नहीं, शिकायत की पुष्टि विभागीय जांच में भी हो गई।
भ्रष्टाचार की बुनियाद इतनी पुख्ता थी कि कोर्ट ने भी कहा—
> “सिर्फ शिकायतकर्ता का बयान ही जांच के लिए पर्याप्त।”
विभागीय जांच में साफ—गंभीर कदाचार
शासन ने साफ लिखा है कि प्राचार्य का कृत्य
“छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन” है।
राशि मांगे जाने की पुष्टि होने के बाद शासन ने कड़ा कदम उठाते हुए—
✔ एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने की सज़ा दी
✔ निलंबन समाप्त किया
✔ और उन्हें मूल विद्यालय से हटाकर राजनांदगांव भेज दिया
सरकार से लेकर लोक सेवा आयोग तक सभी ने माना दोषी
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने भी पत्र जारी कर इस कार्रवाई पर अपनी सहमति दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला सिर्फ “शिकायत” नहीं, बल्कि साबित भ्रष्टाचार का था।
सरकारी धन में सेंध लगाने वाले शिक्षक पर सख्त संदेश
बेटियों की सुरक्षा और आत्मरक्षा जैसी महत्वपूर्ण योजना से “कट” मांगने वाले प्राचार्य के खिलाफ यह निर्णय पूरे शिक्षा विभाग के लिए एक सख्त संदेश है कि—
जो शिक्षक बेटियों की योजनाओं में भी भ्रष्टाचार करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी, चाहे वे किसी भी पद पर हों।
